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मुख्य डाकघर में पिछले कई महीनों से ₹10 और ₹20 के पोस्टल ऑर्डर नहीं हैं उपलब्ध

 

रामनगर से एक अहम खबर सामने आ रही है,यहां के मुख्य डाकघर में पिछले कई महीनों से ₹10 और ₹20 के पोस्टल ऑर्डर उपलब्ध नहीं हैं, ये वही पोस्टल ऑर्डर हैं, जिनका उपयोग सूचना का अधिकार अधिनियम यानी RTI के तहत आवेदन करने के लिए किया जाता है.
सरकार ने RTI कानून 2005 में लागू किया था ताकि आम नागरिक सरकारी तंत्र से जवाबदेही मांग सकें,लेकिन रामनगर जैसे कस्बों में अगर लोगों को RTI दाखिल करने के लिए जरूरी साधन ही न मिलें, तो यह सवाल उठाता है कि आखिर आम जनता की आवाज़ कैसे पहुंचेगी सिस्टम तक?
रामनगर के डाकघर में नागरिकों को लगातार इस परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है कि वहां केवल ₹50 के पोस्टल ऑर्डर ही उपलब्ध हैं. जबकि RTI एक्ट के तहत आवेदन दाखिल करने के लिए ₹10 का पोस्टल ऑर्डर अनिवार्य होता है.
उसके साथ ही अन्य कार्यों में भी 10 और 20 के पोस्टल आर्डर काम आते हैं.
ऐसे में या तो लोग ₹50 खर्च कर रहे हैं — जिसका शेष हिस्सा व्यर्थ चला जाता है — या फिर उन्हें लौटना पड़ रहा है बिना RTI दाखिल किए, इस स्थिति में RTI के अधिकार का सही इस्तेमाल प्रभावित हो रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक न तो डाकघर स्तर पर कोई हल निकाला गया है और न ही उच्चाधिकारियों की ओर से कोई समाधान मिला है.लोगो का कहना है हम RTI लगाने आए, लेकिन यहां 10 और 20 का पोस्टल ऑर्डर ही नहीं मिल रहा, 50 का पोस्टल ऑर्डर जबरन लेना पड़ रहा है, जिसका 40 बेकार चला जाता है,ये गरीब जनता के लिए बोझ बन गया है. इस पूरे मामले पर जब रामनगर डाकघर के पोस्ट मास्टर जीएस गंगोला से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी दी कि अप्रैल महीने में हल्द्वानी डाकघर से कुछ सीमित संख्या में पोस्टल ऑर्डर प्राप्त हुए थे, लेकिन वे अब समाप्त हो चुके हैं। गंगोला का कहना है कि यह समस्या सिर्फ रामनगर की नहीं है हल्द्वानी मुख्य डाकघर में भी 10 और 20 के पोस्टल ऑर्डर की सप्लाई नहीं है.हमने इस समस्या की जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को दे दी है, हमें आशा है कि जल्दी ही 10 और 20 के पोस्टल ऑर्डर उपलब्ध होंगे और जनता को राहत मिलेगी.
जब सूचना का अधिकार अधिनियम जैसे कानून का पालन ही ढंग से न हो पाए, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। आम जनता की भागीदारी और जवाबदेही की उम्मीदें तभी पूरी हो सकती हैं, जब उसे सही साधन और सुविधाएं मिलें.
अब देखना यह है कि डाक विभाग इस समस्या को कितनी जल्दी हल करता है और क्या जनता को उनका सूचना पाने का संवैधानिक अधिकार बिना अड़चन मिल पाएगा या नहीं

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